सकारात्मक बदलाव की आधारशिला है शिक्षा

Times India Today | : Aug 08,2016 12:59 PM IST

शालिनी तिवारी 

 



बदलाव के मायने : सकारात्मक बदलाव यानी ऐसा बदलाव जो जीव, प्रकृति और पर्यावरण के वर्तमान एवं भविष्य के लिए सार्थक के साथ-साथ तीनों में सौहार्दपूर्ण सामंजस्य स्थापित करने में समर्थ हो। बदलाव तो अवश्यंभावी है। सिर्फ बदलाव हो जाना ही पर्याप्त नहीं है, अपितु बदलाव के साथ-साथ हमारी मानवता, नैतिकता और भौतिकता समग्र रूप से अग्रेसित होनी चाहिए।



गौरतलब है कि वर्तमान सदी में बदलाव की गति अवश्य तेज हुई है, चौतरफ़ा 'देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है' के नारे गूंज रहे हैं परन्तु क्या यह सच नहीं है कि भौतिकता में हम जितना आगे बढ़ रहे हैं उतना ही हम प्रकृति, पर्यावरण और स्वयं की सामंजस्यता से भी परे होते जा रहे हैं? वजह भी साफ़ है कि हम भौतिकता की लोलुपता में इतने मशगूल हो चुके हैं कि हमारी अन्तर्दृष्टि और दूरदृष्टि एक संकुचित दायरे में सिमटकर निरर्थक बदलाव की मूक साक्षी बन चुकी है।



 



सार्थक शिक्षा : शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा के 'शिक्ष' धातु से बना है। जिसका अर्थ है- सीखना और सिखाना। अंग्रेजी भाषा में शिक्षा को "Education (एजुकेशन)" कहा जाता है, जो कि लैटिन भाषा के E (ए) एवं Duco (ड्यूको) शब्द से मिलकर Education (एजूकेशन) बना है। "E (ए)" शब्द का अर्थ 'अन्दर से' और "Duco (ड्यूको)" शब्द का अर्थ है 'आगे बढ़ना' अर्थात Education शब्द का शाब्दिक अर्थ "अन्दर से आगे बढ़ना" है। दूसरी स्वीकरोक्ति यह है कि लैटिन भाषा के "Educare (एजुकेयर)" तथा "Educere (एजुशियर)" शब्द को भी "Education" शब्द के मूल रूप में स्वीकार किया जाता है। कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि आंतरिक शक्तियों को बाहर लाने अथवा विकसित करने की क्रिया शिक्षा कहलाती है। कई अन्य विद्वानों की परिभाषाएं निम्न हैं- 



 



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