मकान का नक्शा पास कराना होगा अब और भी आसान

Times India Today | : Mar 22,2016 07:31 AM IST

नई दिल्ली। दिल्ली के लिए तैयार किए जा रहे बिल्डिंग बायलॉज के तहत नक्शे मंजूर कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत न सिर्फ अप्रूवल को आसान बनाए जाने की तैयारी है, बल्कि इसमें दस्तावेज की तादाद भी कम की जा सकती है। उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली के लिए नए बिल्डिंग बायलॉज अगले एक महीने में लागू किए जा सकते हैं। ये बायलॉज, शुक्रवार को जारी किए गए मॉडल बायलॉज से अलग होंगे।



 





नहीं करना होगा लंबा इंतजार



 



जानकार सूत्रों के मुताबिक नए बिल्डिंग बायलॉज में यह व्यवस्था की जा रही है कि अगर किसी प्लॉट का साइज 500 वर्ग मीटर से कम है तो उसके लिए उसे नक्शे मंजूर कराने के लिए भटकने की जरूरत नहीं होगी। इस मामले में सिर्फ योग्य आर्किटेक्ट से नक्शा तैयार कराना होगा और उसके बाद उसे जरूरी फीस के साथ क्षेत्र की लोकल बॉडी यानी नगर निगम या डीडीए आदि के पास जमा कराकर उसकी रसीद लेनी होगी। इसी रसीद को ही लोकल बॉडी की मंजूरी माना जाएगा। इस तरह से नक्शा मंजूर कराने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा।



 





लोकल बॉडी को सिर्फ सूचना देनी होगी



 



दूसरा बदलाव यह किया जा रहा है कि अब अगर किसी नगर निगम के अलावा किसी दूसरे महकमे की मंजूरी की जरूरत है तो उसके लिए बिल्डिंग बनाने वाले को भागने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि दूसरे महकमों से मंजूरी लेने का काम लोकल बॉडी यानी नगर निगम, डीडीए, छावनी बोर्ड या फिर एनडीएमसी ही करेगा। मकान या बिल्डिंग बनाने वाले को अपने दस्तावेज अपनी लोकल बॉडी के पास ही जमा कराने होंगे। यही नहीं, पहले निर्माण कार्य शुरू करने से पहले लोकल बॉडी की मंजूरी लेनी होती थी, अब मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ लोकल बॉडी को सूचना ही देनी होगी कि किस दिन से निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है। इसी तरह से लोकल बॉडी के लिए यह नियम बनाया जा रहा है कि अगर उनके पास नक्शे की मंजूरी के लिए कोई प्लान जमा किया जाता है तो उसे 30 दिन में ही मंजूर करना होगा। पहले यह अवधि 60 दिन थी। 



 



दस्तावेज का बोझ भी होगा कम



 



दस्तावेज में भी कमी की तैयारी की जा रही है। नए बायलॉज में पहले नक्शा आदि मंजूर कराने के लिए जहां 40 दस्तावेज जमा कराने होते थे, उन्हें अब नए नियमों में कम करके 15 करने की तैयारी है। इसी तरह से अब एफिडेविट देने की बजाय सिर्फ अंडरटेकिंग देने की ही जरूरत होगी। इसी तरह से कम्प्लीशन सर्टिफिकेट लेने के लिए पहले जहां 30 दस्तावेज जमा कराने होते थे, वहीं नए बिल्डिंग बायलॉज में यह संख्या कम करके नौ की जा सकती है। एक सीनियर अफसर के मुताबिक बिल्डिंग बायलॉज में डूइंग इजी बिजनेस के लिए कुछ और नियमों को भी आसान बनाया जा रहा है। इसके लिए शहर और बिल्डिंग को 4 श्रेणियों में बांटा जा रहा है। इनमें बेहद कम रिस्क, कम रिस्क, मॉडरेट और हाई रिस्क शामिल है। 



 



इस तरह से वेयर हाउस और गोदाम बनाने के लिए भी बिल्डिंग बायलॉज में नियम होंगे। डीयूएसी के सूत्रों का कहना है कि दरअसल, शहरी विकास मंत्रालय ने उसे बिल्डिंग बायलॉज बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। डीयूएसी ने ये बायलॉज बनाकर शहरी विकास मंत्रालय को दे दिए हैं और उम्मीद है कि जल्द ही ये बिल्डिंग बायलॉज मंत्रालय जारी कर देगा। सूत्रों के मुताबिक चूंकि दिल्ली की लैंड का विषय केंद्र के पास है इसलिए ये बिल्डिंग बायलॉज दिल्ली में अनिवार्य रूप से लागू करने होंगे। 



 

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