रियल एस्टेट बिल ने बढ़ाई बिल्डर्स की परेशानी

Times India Today | : Mar 22,2016 07:36 AM IST

नई दिल्ली। रियल एस्टेट सैक्टर को रेग्युलेट करने वाले नए बिल ने बिल्डर्स की परेशानी बढ़ा दी है, जो 2 प्रमुख प्रावधानों को लेकर चिंतित हैं, जिनसे प्रोजैक्ट में देरी के साथ उन पर वित्तीय दबाव भी बढ़ सकता है। हालांकि, कानून के जानकारों का कहना है कि बिल्डर्स को परेशान नहीं होना चाहिए। बिल्डरों को लग रहा है कि अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजैक्ट्स के रजिस्ट्रेशन से देरी हो सकती है। वह इस बात से भी चिंतित हैं कि कस्टमर्स से लिए गए फंड्स के 70 प्रतिशत हिस्से को अलग रखने से उनकी लिक्विडिटी (कैश) पोजिशन पर दबाव बनेगा, जो पहले से ही खराब है।

 

रियल एस्टेट (रेग्युलेशन ऐंड डिवेलपमेंट) बिल पर राज्य सभा की सिलेक्ट कमेटी के साथ विचार-विमर्श में शामिल रहे वकीलों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसमें जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है, उससे लगता है कि कानून को पीछे की तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। रियल एस्टेट सैक्टर काफी हद तक अन-ऑर्गनाइज्ड है। बिल का मकसद इसमें पारदर्शिता बढ़ाना है।

 

लॉ फर्म सेठ दुआ ऐंड असोसिएट्स के पार्टनर वसंत राजशेखरन का कहना है कि इसका मकसद बिल्डर्स को उनके बिजनेस प्लान के अनुसार आजादी देना और बायर्स को सिक्यॉरिटी देना है। उन्होंने कहा, 'यह दोनों पक्षों के हितों के बीच बैलेंस बनाना चाहता है।' बिल के मुताबिक बिल्डर्स को बायर्स से लिए गए पैसे का 70 प्रतिशत हिस्सा एक अलग अकाऊंट में रखना होगा। इस फंड का इस्तेमाल जमीन और कंस्ट्रक्शन के लिए किया जा सकेगा। इसका मकसद कन्ज्यूमर्स के हितों की रक्षा करना और फंड्स के डायवर्जन को रोकना है।

 

राजशेखरन ने बताया कि इसका मतलब यह है कि अलग अकाऊंट में फंड्स डिपॉजिट करने के बाद बिल्डर्स जमीन खरीदने के लिए खर्च किए गए पैसे को निकाल सकेंगे और बाकी का इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन के लिए कर सकेंगे। जो पैसा अलग अकाऊंट्स में जमा नहीं होगा, वह बिल्डर के पास ही रहेगा। प्रॉपर्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे में बिल्डर्स जमीन खरीदते वक्त चेक के जरिए भुगतान करेंगे, जिससे सैक्टर में ब्लैक मनी का फ्लो घटेगा।

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